शक्कर का चक्कर।

भोज्य पदार्थों में प्रमुख रूप से मीठा, खट्टा, खारा, तीखा, कड़वा, और कसैला आदि 6 स्वाद होते हैं। इन सभी में सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला स्वाद मीठा है। भोज्य पदार्थों में मीठा स्वाद उनमें पाई जाने वाली प्राकृतिक शक्कर के कारण होता है। मनुष्य को मीठा स्वाद सभी स्वादों से ज्यादा पसंद होता है। सबसे ज्यादा खुशी मीठे खाने से ही मिलती है। प्राचीन काल में मीठे भोज्य पदार्थों के रूप में मनुष्य मीठे फलों और शहद पर ही निर्भर था। इस मिठास को बढ़ाने और सहज और सुलभ बनाने के लिए प्राकृतिक स्रोतों से शक्कर को निकालकर परिष्कृत चीनी (शक्कर, मिश्री, गुड, खांड आदि) के रूप में उपयोग किया जाने लगा। इसे ही प्रोसेस्ड शुगर कहा जाता है।

मनुष्य की मिठास की लालसा बढ़ती गई, साथ ही शक्कर का उपभोग भी बढ़ता चला गया। मीठे फलों से तृप्ति नहीं मिली तो शक्कर, मिश्री, गुड, खांड आदि बनाया जाने लगा। और इन मीठे पदार्थों के उपयोग से विभिन्न मधुर व्यंजन बनाए एवं उपभोग किए जाने लगे। हमारे देश के हर प्रदेश, और हर प्रदेश के अलग अलग संभागों के पास अपने तरह के खास व्यंजन, मिठाई और पेय पदार्थ हैं, जो उन क्षेत्रों की खास सांस्कृतिक पहचान के रूप में भी जाने जाते हैं। जैसे..मथुरा का पेड़ा, आगरा का पेठा, ग्वालियर की गजक, बंगाल का रसगुल्ला, राजस्थान के मालपुआ और घेवर, गुजरात के वासुंदी और मोहनथाल, महाराष्ट्र के मोदक, पंजाब की पिन्नी और लस्सी, कर्नाटक के मैसूरपाक आदि।
इनमें कई तरह की मिठाईयां, जैसे मिल्क प्रोडक्ट मावा आदि से निर्मित मिठाईयां, बेसन से निर्मित मिठाईयां, आटे और मैदे से निर्मित मिठाईयां, ड्राई फ्रूट से निर्मित मिठाईयां, आदि। विभिन्न प्रकार की जलेबियां, विभिन्न प्रकार के रसगुल्ले एवं गुलाब जामुन, विभिन्न प्रकार के लड्डू पेड़े जैसे बूंदी के, मोतीचूर के, बेसन के, आटे, मैदे के, गुड के, चूरमे के। विभिन्न प्रकार के हलुवा एवं पाक आदि, विभिन प्रकार की खीरें, कई तरह के पेय जैसे लस्सी, शेक, रबड़ी, कई तरह के खुरमे (कुकीज़, बिस्किट्स आदि), कई तरह के केक। विभिन्न मालपूए, घेवर, बालूशाही आदि। कई तरह की चिक्कियां, पैठे, गजक, रेवड़ी, चिरौंजी, बतासे। कई तरह के ठंडे व्यंजन, जैसे कुल्फी, फालूदा, श्रीखंड, लस्सी, गन्ने एवं फलों के रस एवं शेक, कस्टर्ड, कई तरह के शरबत और ठंडाई, आम पन्ना, शिकंजी एवं बर्फ के गोले आदि। आधुनिक विकास के युग में ये सारे व्यंजन अब हर जगह उपलब्ध हैं, और बहुतायत से उपयोग किए जाने लगे हैं। इनके अलावा दैनिक मीठे पेय जैसे चाय और कॉफी का भी शक्कर के उपभोग को बढ़ाने में प्रमुख योगदान है। इस तरह लगता है जैसे भारत में मीठे व्यंजनों का महासागर हिलोरे लेते रहता है। फिर भी शायद लोगों की तृष्णा शांत नहीं हुई तो, विदेशी कंपनियों के “कुछ मीठा हो जाए” वाले विज्ञापनों एवं कोल्ड ड्रिंक्स के माध्यम से और मिठास बढ़ाई जा रही है।

इन व्यंजनों को ताजे रूप में उपयोग करने पर शक्कर का उपभोग फिर भी सीमित था। पर अब ये सारे व्यंजन रेडी टू कुक, और रेडी टू ईट वाली व्यावसायिक प्रक्रिया के माध्यम से और भी सरल और सुलभ हो गए हैं। इन व्यंजनों के अलावा आधुनिक युग में विभिन्न प्रकार की कैंडी, टॉफी, कुकीज़, क्रीम बिस्किट्स, आइसक्रीम, केक, पेस्ट्रीज, क्रीम रोल, पैक्ड मिठाइयां आदि भी उपलब्ध हैं। अनेकों देशी मीठे व्यंजनों के अलावा कई विदेशी मिठाईयां, मीठे पेय, भी अब दुकानों, रेस्टोरेंटों, और ऑनलाइन स्टोर पर उपलब्ध हैं।
इस तरह हमारे देश में शक्कर का उपभोग निरंतर बढ़ता जा रहा है।
कुछ प्रमुख अध्ययनों के अनुसार हमारे देश में प्रति व्यक्ति शक्कर का उपभोग बढ़ने घटने के ट्रेंड निम्नांकित है…

1968: 4.20 किलोग्राम प्रति व्यक्ति था। (सर्वकालिक निम्न स्तर)।
2005–2009: प्रति व्यक्ति उपभोग (गुड़ सहित) प्रति वर्ष 25-28 किलोग्राम के आसपास उतार-चढ़ाव भरा रहा, जिसमें पारंपरिक गुड़ से रिफाइंड चीनी की ओर एक निरंतर बदलाव देखा गया।
2018–2023: कुल स्वीटनर (मधुरक) उपभोग के साथ, केवल रिफाइंड चीनी का उपभोग 2018 में 22.3 किलोग्राम के चरम पर पहुँच गया और फिर 17-19 किलोग्राम/वर्ष प्रति व्यक्ति के आसपास स्थिर हो गया।
2023–2024: कुल चीनी, गुड़ और खांडसारी का उपभोग प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष लगभग 25.5 किलोग्राम तक पहुँच गया।
कहां और कैसे उपभोग होती है शक्कर?
दैनिक खपत में : औसत भारतीय प्रतिदिन लगभग 52 ग्राम शक्कर का उपभोग करता है, जिसमें मीठे पेय पदार्थों (चाय, कॉफी एवं अन्य कोल्ड ड्रिंक्स) की उच्च खपत महत्वपूर्ण योगदान देती है, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में। बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली और गुड़गांव जैसे शहरों में शक्कर का उपभोग सबसे अधिक है,
त्योहारों, शुभ अवसर, एवं उत्सवों के दौरान:
विभिन्न त्योहारों, शादियों, अन्य उत्सवों के दौरान शक्कर के उपभोग में 20% से ज्यादा की वृद्धि होती है। हमारे देश में पूरे साल कई त्यौहार मनाए जाते हैं, अतः यह वृद्धि निरंतर बनी रहती है।
साथ ही पारंपरिक गुड़ के उपभोग में गिरावट आई है (2005 में 8.0 किलोग्राम/प्रति व्यक्ति से 2009 में 4.1 किलोग्राम), सफेद चीनी का उपयोग काफी बढ़ गया है।

शक्कर के उपभोग से संबंधित प्रमुख आंकड़े और तथ्य:

  1. भारत बनाम वैश्विक औसत…
    यद्यपि भारत मात्रा के हिसाब से चीनी का दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता है (सालाना लगभग 30-32 मिलियन मीट्रिक टन का उपयोग करता है), परन्तु प्रति व्यक्ति आंकड़े एक अलग कहानी बयां करते हैं। जैसे भारत का परिष्कृत चीनी का उपभोग प्रति व्यक्ति लगभग 20 किलोग्राम/वर्ष है, जो 22 से 23 किलोग्राम/वर्ष के वैश्विक औसत से नीचे है। परन्तु जब गुड़ (gur) और खांडसारी जैसे पारंपरिक विकल्पों को जोड़ा जाता है, तो भारत का कुल स्वीटनर सेवन प्रति व्यक्ति 25.5 किलोग्राम/वर्ष तक पहुंच जाता है। जो वैश्विक बेसलाइन को पार कर जाता है।
    शक्कर की भारत में प्रति व्यक्ति खपत अभी भी अमेरिका या यूरोपीय देशों की तुलना में काफी कम है, जहां वार्षिक शक्कर का सेवन प्रति व्यक्ति 40 किलोग्राम से अधिक हो सकता है।
  2. 2030 तक चीनी के बाजार और खपत का पूर्वानुमान:
    इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) द्वारा दिए गए आंकड़े बताते हैं कि शक्कर की कुल खपत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
    कुल चीनी की मांग 2029-2030 तक सालाना 1.5% से 2% बढ़ने का अनुमान है, एवं भारत का कुल चीनी बाजार 2030 तक लगभग 30.8 मिलियन टन से बढ़कर 36.98 मिलियन टन होने की उम्मीद है। शक्कर का उपभोग बढ़ाने में अब केवल संपन्न (अमीर) वर्गों की भूमिका नहीं है। अब कम आय वाले परिवारों द्वारा भी ब्रांडेड, पैकेज्ड चीनी, गुड़ और खांडसारी के अधिक उपभोग की भी बड़ी भूमिका है।
  3. शहरी बनाम ग्रामीण असमानताएं:
    भारत में चीनी खाने की आदतें भूगोल और सामाजिक-आर्थिक परिवेश के आधार पर तेजी से बदलती हैं। विभिन्न राष्ट्रीय सर्वेक्षण संकेत देते हैं कि दैनिक चीनी का सेवन शहरी क्षेत्रों में औसतन लगभग 27.4 ग्राम/दिन है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 23.9 grams/day है।
    वहीं संपन्न शहरी परिवारों द्वारा वैकल्पिक स्वस्थ स्वीटनर्स और चीनी-मुक्त (शुगर-फ्री) उत्पादों की ओर झुकाव के कारण टियर-1 शहरों में चीनी की खपत स्थिर होने लगी है।
    वहीं ग्रामीण क्षेत्रों और टियर-2/टियर-3 शहरों में चीनी के उपभोग की वार्षिक विकास दर (CAGR) तेजी से बढ़ रही है। यह बड़े पैमाने पर सस्ते पैकेज्ड खाद्य पदार्थों और शीतल पेयों (सॉफ्ट ड्रिंक्स) की अचानक और भारी उपलब्धता के कारण हो रहा है।
  4. “छिपी हुई चीनी” (हिडन शुगर)
    भारत में शक्कर के बढ़ते उपभोग का प्रमुख कारक घरेलू उपयोग से फैक्ट्री प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) की ओर बदलाव है। थोक औद्योगिक खरीदार (पेय पदार्थ, बिस्कुट, प्रसंस्कृत स्नैक्स और त्योहारी मिठाइयों के निर्माता) भारत में कुल चीनी की खपत का भारी भरकम 60% से 65% हिस्सा रखते हैं। वहीं घरेलू खपत (घरेलू चाय या खाना पकाने के लिए खरीदी जाने वाली टेबल शुगर) बाजार का केवल 35% से 40% हिस्सा है। इसका मतलब यह है कि औसत व्यक्ति खुद चाय के कप में चीनी मिलाने के बजाय प्रसंस्कृत और अति-प्रसंस्कृत (अल्ट्रा-प्रोसेस्ड) वस्तुओं के अंदर “छिपी हुई चीनी” का अधिक सेवन कर रहा है।
    स्वास्थ्य पर प्रभाव: चीनी का उच्च उपभोग भारत में मधुमेह (डायबिटीज) के साथ जी रहे 101 मिलियन लोगों से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उपभोक्ताओं में से एक बना हुआ है, और प्रति व्यक्ति उपभोग वैश्विक औसत की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है। आजकल बच्चे भी टॉफी, कैंडी, कोल्ड ड्रिंक्स, केक, पेस्ट्री और विभिन्न मिठाईयां अधिक मात्रा में सेवन करने लगे हैं। बच्चों के अधिक मीठे के सेवन से अधिकांश बच्चे चाइल्डहुड ओबेसिटी मतलब बचपन में ही मोटापे के शिकार हो जाते हैं। बढ़ा हुआ मोटापा बच्चों और बड़ों में डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, और हार्ट अटैक का प्रमुख कारण है। भारत में बढ़ती उपरोक्त स्वास्थ्य समस्याओं का सीधा संबंध बढ़ते हुए शक्कर के उपभोग से ही है।

जब अत्यधिक मात्रा में शुगर इंटेक होता है तो ब्लड ग्लूकोज बहुत तेजी से बढ़ जाता है। जिसे सामान्य रखने के लिए शरीर में बीटा सेल्स द्वारा इंसुलिन अधिक मात्रा में बनाया जाने लगता है। बार बार ऐसा होने पर बीटा सेल्स पर बुरा असर होता और वे नष्ट होने लगती हैं। आगे चलकर ऐसे बच्चे और व्यक्ति डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं।

अत्यधिक मात्रा में शक्कर या मीठे का सेवन करने से रक्त में बढ़ी हुई शक्कर की मात्रा को लिवर द्वारा चर्बी में परिवर्तित कर दिया जाता है, और शरीर के विभिन्न अंगों में यह चर्बी जमा होती रहती है। यही जमा होने वाली चर्बी मोटापे का कारण बनतीं है, और अन्य घातक बीमारियों जैसे मधुमेह, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग आदि का खतरा भी बढ़ाती है।

इन सभी बीमारियों और मोटापे से बचने के लिए मीठे भोजन और पेय पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। परिष्कृत चीनी या सफेद शक्कर की जगह, प्राकृतिक मीठे भोज्य पदार्थ जैसे फलों का सेवन करना चाहिए।

सफेद शक्कर के कम से कम उपयोग के साथ भोजन में मिठास बनाए रखने के लिए क्या उपाय और विकल्प उपलब्ध हैं? इस विषय पर चर्चा हम अगले लेख में करेंगे।

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