सार्कोपेनिया (Sarcopenia):ढलती उम्र की बढ़ती समस्या।

पृथ्वी पर पाए जाने वाले हर जीव की जन्म से लेकर मृत्यु तक विभिन्न शारीरिक अवस्थाएं होती हैं। जन्म लेते ही सभी विकसित होने लगते हैं। जैसे सूरज उदित होते ही धीरे धीरे आसमान में चढ़ने लगता है और एक निश्चित समय अंतराल के बाद धीरे धीर ढलने लगता है। इसी तरह मनुष्य के जीवन की प्रवृति चढ़ने और ढलने की होती है। जैसे बचपन, जवानी और बुढ़ापा। बुढ़ापे को उम्र ढलने के रूप में देखा जाता है। यह हर प्राणी का परम सत्य है। हमारी उम्र बढ़ रही होती है, पर लगभग 50 वर्ष के ऊपर उम्र बढ़ने पर उम्र ढलना क्यों कहा जाता है?

आइए इस पहेली को समझते हैं…

जीव विज्ञान की दृष्टि से देखें तो हमारा शरीर एक ऐसी मशीन है जो पहले खुद को बनाती है और फिर धीरे-धीरे रखरखाव की अवस्था में चली जाती है, आगे यह धीरे धीरे जीर्णता या ह्रास का रुख कर लेती है। (जीर्णता उम्र बढ़ने के साथ शरीर की कार्यक्षमता में कमी, ऊतकों का ह्रास और धीरे-धीरे मृत्यु की ओर बढ़ने को कहते हैं)। हम जानते हैं कि बचपन से लेकर जवानी तक हमारा शरीर विकसित हो रहा होता है, ऊंचाई बढ़ती है, मांसपेशियों से शरीर भरने लगता है, ताकत बढ़ती है। फिर लगभग 30 वर्ष की आयु के बाद यह सब स्थिर हो जाता है, फिर लगभग 50 से 55 वर्ष की आयु के बाद शरीर की विभिन्न क्षमताएं कम होने लगती हैं।

50 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले अधिकांश पाठकों ने अपने शरीर में निम्नांकित बदलाव महसूस किए होंगे…

  1. शारीरिक कमजोरी : दैनिक काम जैसे कि भारी सामान उठाना या सीढ़ियाँ चढ़ने में कठिनाई महसूस होना।
  2. चलने फिरने में कठिनाई : चलने की गति में कमी आना। पहले की तरह तेज न चल पाना। या युवाओं के साथ तेज चलने में कठिनाई महसूस करना। ज्यादा देर तक न चल पाना। चलते चलते अचानक पैर कांपने लगना।
  3. शारीरिक संतुलन खोना : चलते समय, या खड़े होते समय अक्सर लड़खड़ा जाना। मन में गिरने का डर बना रहना।
  4. वजन कम होना : बिना किसी बीमारी के वजन कम होना। वजन कम करने के प्रयास के बिना ही वजन कम होना। यह मांसपेशियों के घटने के कारण होता है।
  5. जल्दी थक जाना : दैनिक कार्यों में पहले की अपेक्षा बहुत जल्दी थकान महसूस करना। पहले की तरह पर्याप्त क्षमता से काम न कर पाना।
  6. अन्य कार्यों में कठिनाइयाँ : जैसे सीढ़ियां चढ़ने उतरने में कठिनाई होना, यहाँ तक कि कुर्सी से उठने में भी कठिनाई होना।
  7. डायबिटीज : बढ़ती उम्र में मांशपेशियों की कमी होने के कारण डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाना। जब शरीर में चर्बी बढ़ जाती है या मांसपेशियों की कमी हो जाती है, तो इससे इंसुलिन रेसिस्टेंस का खतरा भी बढ़ जाता है। इंसुलिन रेसिस्टेंस डायबिटीज का एक प्रमुख कारण है।

यह बदलाव मुख्य रूप से मांसपेशियों के क्षरण के कारण होते हैं, जिसका बढ़ती उम्र के साथ सीधा संबंध होता है। इसे ही सार्कोपेनिया के नाम से जाना जाता है। अतः सार्कोपेनिया वह स्थिति है जिसमें उम्र के साथ मांसपेशियों (muscles) का बल और उनका आकार कम होने लगता है। सार्कोपेनिया हमारी ढलती उम्र का प्रमुख कारण है। यह ढलती उम्र का संकेत भी है। कई लोगों में सार्कोपेनिया के लक्षण कम उम्र में दिखने लगते हैं, वहीं कई लोगों में इसके लक्षण बड़ी उम्र में भी काफी कम दिखते हैं।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सार्कोपेनिया उम्र ढलने से संबंधित तो है ही, पर इसके अन्य कारण भी होते हैं।
आइए जानते हैं सार्कोपेनिया के क्या कारण हैं?

सार्कोपेनिया के प्रमुख कारण :

प्रोटीन की कमी : मांसपेशियों के निर्माण के लिए प्रोटीन मुख्य घटक है। हमारे देश के दैनिक खानपान में अक्सर इसकी मात्रा कम होती है, खास तौर पर शाकाहारी भोजन में। प्रोटीन की कमी से मांसपेशियों का निर्माण और मरम्मत ठीक से नहीं हो पाती। अतः मांसपेशियाँ कमजोर होने लगती हैं।

शारीरिक निष्क्रियता : मांशपेशियों का जितना ज्यादा उपयोग होता उनमें उतनी ही वृद्धि होती है। वहीं मांसपेशियों के उपयोग न होने से ये कमजोर होने लगती हैं, तथा इनका घनत्व (Density) भी कम होने लगता है। USE IT OR LOOSE IT (इस्तेमाल करें वरना खो दें) का नियम यहाँ लागू होता है। व्यायाम या शारीरिक श्रम न करने से मांशपेशियाँ सिकुड़ने लगती हैं।

हार्मोनल बदलाव : उम्र के साथ शरीर में टेस्टोस्टेरोन और ग्रोथ हार्मोन का स्तर कम होने लगता है। इन हार्मोन्स का प्रोटीन मेटाबॉलिज्म में महत्वपूर्ण योगदान होता है। इन हार्मोन्स की कमी से मांसपेशियों (Muscle) के स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ता है। यह मांसपेशियों के आकार और मजबूती घटने (Atrophy) का मुख्य कारण है। इन हार्मोन्स की कमी से व्यायाम के बावजूद भी मांसपेशियों के विकास में बाधा आती है। इन हार्मोन्स की कमी से हड्डियों का घनत्व भी कम हो सकता है।

विटामिन “डी” की कमी : विटामिन डी की कमी से भी मांसपेशियों में कमजोरी, दर्द, थकान होना आम बात है। यह मांसपेशियों के सिकुड़ने (Atrophy) का एक बड़ा कारण है। यह हड्डियों के साथ-साथ मांसपेशियों की क्रियाशीलता, संकुचन और ताकत के लिए बहुत जरूरी है, विटामिन डी की कमी से चलने-फिरने में कठिनाई और गिरने का जोखिम बढ़ जाता है।

दवाइयों के कारण : कुछ दवाइयाँ जैसे कॉर्टिकोस्टेरॉइड के लंबे समय तक सेवन से मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं। ये दवाइयाँ अक्सर अस्थमा, आर्थराइटिस और एलर्जी आदि बीमारियों के इलाज में उपयोग की जाती हैं।

कुछ शारीरिक स्थितियाँ : किसी लंबी बीमारी जिसमें व्यक्ति बिस्तर से उठ नहीं पाते अथवा ऑर्थराइटिस के कारण व्यायाम नहीं कर पाते। ऐसी स्थितियों में शारीरिक निष्क्रियता भी मांसपेशियों के कमजोर होने का बड़ा कारण है।

मेनोपॉज : महिलाओं में मेनोपॉज के बाद मांसपेशियाँ स्वतः ही कमजोर होने लगती हैं।

अतः हमने देखा कि बढ़ती उम्र के साथ सार्कोपेनिया होने के अन्य कारण भी होते हैं। लोगों के खानपान, जीवन शैली, और शारीरिक स्वास्थ्य की स्थितियाँ अलग अलग होने के कारण ही अलग अलग लोगों में सार्कोपेनिया कम या अधिक आयु में होना पाया जाता है। इन्हीं कारणों को दूर रखकर सार्कोपेनिया से काफी हद तक बचा जा सकता है।

सार्कोपेनिया के प्रमुख परीक्षण एवं जाँचें :

शारीरिक प्रदर्शन परीक्षण (Physical Performance Tests) :

  1. चलने की गति का परीक्षण : आप 4 मीटर की दूरी कितनी जल्दी तय करते हैं। धीमी गति (0.8 मीटर/सेकंड से कम) मांसपेशियों की कमजोरी दर्शाती है।
  2. टाइम अप-एंड-गो टेस्ट (TUG) : कुर्सी से उठने, 3 मीटर चलने और वापस बैठने की गति का परीक्षण।
  3. चेयर स्टैंड टेस्ट (Chair Stand Test) : इसमें देखा जाता है कि आप 30 सेकंड में बिना हाथों के सहारे कुर्सी से कितनी बार उठ और बैठ सकते हैं? यह पैरों की ताकत मापता है।

मांसपेशियों की ताकत का परीक्षण (Strength Test) :

  1. हैंडग्रिप डायनेमोमीटर टेस्ट : इसमें हाथ की पकड़ की मजबूती मापी जाती है, जो पूरे शरीर की मांसपेशियों की ताकत का संकेत देती है। मांसपेशियों की मात्रा (Muscle Mass/Quantity) के परीक्षण:
  2. DEXA scan : (Dual-Energy X-ray Absorptiometry) यह पूरे शरीर की मांसपेशियों, वसा और हड्डियों के घनत्व को मापता है।
  3. Bioelectrical Impedance Analysis (BIA) : यह परीक्षण शरीर में वसा के मुकाबले लीन बॉडी मास (मांसपेशियों की मात्रा) को मापता है।
  4. MRI या CT स्कैन : ये परीक्षण मांसपेशियों की मात्रा और गुणवत्ता मापने के लिए सबसे सटीक होते हैं। लेकिन ये महंगे विकल्प हैं।

स्क्रीनिंग टूल:

SARC-F प्रश्नावली: यह एक सरल प्रश्नावली है जो ताकत, चलने में कठिनाई, उठने-बैठने की क्षमता, सीढ़ियाँ चढ़ना और गिरने की घटनाएं आदि 5 प्रश्नों पर आधारित होती है। इसको दी गई तालिका से ठीक से समझा जा सकता है

जाँचें कब कराएं?

यदि उम्र बढ़ने के साथ (लगभग 50 वर्ष के बाद) चलने में सुस्ती, कमजोरी, या रोजमर्रा के कामों में थकान महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जाँचें करानी चाहिए।

बचाव और उपचार के उपाय :

प्रतिरोध व्यायाम (Resistance excercise) : केवल पैदल चलना काफी नहीं है। मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए हल्के वजन उठाना या रेजिस्टेंस बैंड का उपयोग करना बहुत प्रभावी है। जब आपकी मांसपेशियाँ किसी प्रतिरोधी बल का प्रयोग करती हैं, तो वे धीरे धीरे मजबूत होने लगती हैं। मांसपेशियों के बढ़ने से चयापचय (metabolism) तेज होता है, जिससे आराम की स्थिति में भी अधिक कैलोरी जलती है।

उदाहरण: डम्बल, बारबेल, रेजिस्टेंस बैंड, या बॉडीवेट एक्सरसाइज (जैसे पुश-अप्स, स्क्वैट्स)।
इसके अतिरिक्त शारीरिक और मानसिक संतुलन ठीक रखने के लिए एरोबिक व्यायाम और योग भी अपनी जीवन शैली में शामिल करें। इससे ढलती उम्र की मानसिकता से निजात मिलने के साथ जिंदादिली बनी रहती है। और यह बढ़ती उम्र की कई समस्याओं को रोकने में सहायक हैं।

आहार : जैसा कि हम जानते हैं मांसपेशियों के निर्माण और मरम्मत में प्रोटीन प्रमुख घटक की भूमिका निभाता है। अतः आहार में उच्च गुणवत्ता के प्रोटीन से भरपूर भोज्य पदार्थों को शामिल करने से मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं। अतः अपने भोजन में दालें, पनीर, अंडे, सोयाबीन, और दूध जैसे प्रोटीन स्रोतों को अवश्य शामिल करें। सामान्य तौर पर प्रति किलो वजन पर लगभग 1.0 – 1.2 ग्राम प्रोटीन का सेवन आदर्श माना जाता है। अतः एक 60 किलो वजन वाले व्यक्ति को 60 से 70 ग्राम प्रोटीन अपने दैनिक भोजन में शामिल करना चाहिए। यह अच्छी गुणवत्ता का होना चाहिए।

विटामिन-D : हड्डियों और मांसपेशियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए विटामिन-D महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह उम्र के साथ होने वाले सार्कोपेनिया के खतरे को कम करने में सहायक है। अतः धूप सेंकें या अपने डॉक्टर की सलाह पर विटामिन डी एवं कैल्शियम सप्लीमेंट लें।

हार्मोन थेरेपी : कुछ मामलों में टेस्टोस्टेरोन सप्लीमेंटेशन से मांसपेशियों की ताकत में सुधार देखा गया है। आप अपने चिकित्सक की सलाह से उचित हार्मोन थैरपी एवं अन्य अमीनो एसिड सप्लीमेंट ले सकते हैं।

“कहा जाता है कि बुढ़ापा हड्डियों से नहीं, बल्कि मांसपेशियों के कम होने से शुरू होता है। सार्कोपेनिया और शेष जीवन काल के बीच एक गहरा और सीधा आनुपातिक संबंध है। यह जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) के घटने का एक प्रमुख संकेतक है।”
सार्कोपेनिया का प्रबंधन सीधे तौर पर आपकी आयु और जीवन की सक्रियता से जुड़ा है। इसे रोक जा सकता है एवं यह पूरी तरह से रिवर्सिबल भी है। यह केवल बुढ़ापे का हिस्सा नहीं है। बल्कि एक ऐसी स्थिति है जिसे हम अपनी आदतों से बदल सकते हैं। इसके लिए सक्रिय जीवनशैली अपनाना चाहिए, व्यायाम करना चाहिए एवं प्रोटीन युक्त संतुलित आहार लेना चाहिए। जरूरी होने पर चिकित्सक की सलाह अनुसार उचित इलाज भी कराया जा सकता है।

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