डायबिटीज के मरीजों को ये सलाह दी जाती है कि, चावल न खाएं या कम खाएं। इसका मुख्य कारण यह है कि पके हुए सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत ज्यादा होता है। सामान्य रूप से खाए जाने वाले सफेद चावल की ग्लाइसेमिक इंडेक्स 70 से 80 होती है। जिसके कारण चावल खाने के बाद खून में शुगर की मात्रा तेजी से बढ़ती है।
विश्व के अनेक भागों में और हमारे देश में भी चावल मुख्य आहार है। तमिलनाडु सहित दक्षिण के कई प्रांत, एवं बंगाल, असम, कश्मीर, इसके मुख्य उदाहरण हैं।
कृषि वैज्ञानिक काफी समय से चावल की ऐसी किस्म विकसित करने की कोशिश कर रहे थे, जिसमें चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम हो एवं प्रोटीन की मात्रा अधिक हो।
हाल ही में ( IRRI ) इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट जिसका मुख्यालय फिलीपींस में है और इसकी एक शाखा वाराणसी में है। IRRI ने घोषणा की है कि उन्होंने चावल की एक ऐसी किस्म विकसित की है जिसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 44 से 47 प्रतिशत है। इसमें फाइबर और प्रोटीन की मात्रा भी अधिक है।
यह शोध न सिर्फ मधुमेह के मरीजों बल्कि किसानों के लिए भी क्रांतिकारी होगा।
