जानिए अपनी दवाइयों को : मोटापे की नई दवाई, (Tirzepatide) टिर्जेपेटाइड।

 

जैसा कि हम जानते हैं हमारे देश में मोटापा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसका सीधा संबंध तेजी से बदलती जीवन शैली है। आजकल के मशीनी युग में शारीरिक श्रम बहुत कम हो गया है। साथ ही गरिष्ठ, हाई कैलोरी एवं उच्च वसा युक्त आहार बहुतायत से लिया जा रहा है। इस तरह कम श्रम और गरिष्ठ भोजन महिलाओं, पुरुषों और बच्चों में मोटापा बढ़ाने का प्रमुख कारण है।
यही मोटापा जीवन शैली संबंधित कई बीमारियों का जनक है। मोटे लोगों में डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, जोड़ों के दर्द, कैंसर आदि का खतरा सामान्य वजन वाले व्यक्ति से कई गुना अधिक होता हैं।

डाइटिंग व एक्सरसाइज़ से कई लोग 5 से 8 किलो तक वजन कम कर पाते हैं। परन्तु इस वजन को कम बनाए रखना लगभग असंभव होता है, और कुछ की महीनों में घटाया गया वजन फिर से बढ़ने लगता है।

वजन कम करने के लिए जीवन शैली में सुधार के अलावा बेरियाट्रिक सर्जरी भी एक अच्छा उपाय है। परन्तु अधिकांश लोग सर्जरी से बचना चाहते हैं। ऐसे ही लोगों के वजन को कम करने के लिए बाजार में विभिन्न प्रकार की दवाइयां उपलब्ध हैं।

भारतीय बाजार में मोटापे और वजन कम करने के लिए बहुत पहले से दवाइयां उपलब्ध हैं। वजन कम करने में इन दवाइयों का मिला जुला असर देखा जाता है। साथ ही इनमें से कुछ दवाइयों के गंभीर साइड इफेक्ट भी पाए गए हैं।

वर्तमान में कई शोधों के पश्चात वजन कम करने के लिए कुछ नई दवाइयां स्वीकृत की गई हैं, और भारतीय बाजारों में उपलब्ध भी हैं। यह दवाइयां न केवल वजन कम करने में कारगर हैं बल्कि टाइप 2 मधुमेह के मरीजों में ग्लूकोज की मात्रा भी नियंत्रित करती हैं। ये दवाइयां इन्क्रेटिन वर्ग में आती हैं।

क्या हैं इन्क्रेटिन?
वैज्ञानिकों ने सालों पहले यह देखा कि मुंह से ग्लूकोज देने पर शरीर में पैदा होने वाले इंसुलिन की मात्रा नस में इंजेक्शन द्वारा ग्लूकोज देने से कहीं ज्यादा होती है। इससे यह सिद्ध हुआ कि इंसुलिन बनाने वाले बीटा सेल्स को ग्लूकोज के अलावा आंतों से आने वाले कुछ अन्य पदार्थ इंसुलिन बनाने के लिए उत्तेजित करते हैं। आगे चल कर शोधों में पाया गया कि आतें ग्लूकोज या भोजन के संपर्क में आने पर दो हार्मोन बनती हैं, जिनका नाम GLP 1 एवं GIP है। इन्हीं हार्मोन्स को इन्क्रेटिन कहते हैं। ये हार्मोन इंसुलिन बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं, साथ ही मस्तिष्क में भूख को नियंत्रित करने की प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। यदि हम इस प्रकार के हार्मोन्स इंजेक्शन द्वारा शरीर में दें तो भूख कम लगती है, और गरिष्ठ भोजन की तलब कम हो जाती है। इन सभी क्रियाओं से इन्क्रेटिन हार्मोन न केवल खून में ग्लूकोज की मात्रा घटाते हैं बल्कि मोटापा भी कम करते हैं। कम मात्रा में दिए जाने पर ये हार्मोन शुगर नियंत्रण के लिए काम में लाए जाते हैं। वहीं अधिक मात्रा में देने पर ये मोटे लोगों का वजन कम करते हैं।

क्या है टिर्जेपेटाइड (Mounjaro) मुंजारो ?
मुंज़ारो एक इन्क्रेटिन मॉलिक्यूल है जो GLP 1 और GIP दोनों की तरह काम करता है। बाजार में उपलब्ध वजन कम करने वाली दवाइयों में यह सबसे ज्यादा प्रभावी है। इसे सबक्यूटेनियस (चमड़े के नीचे इंसुलिन की तरह) इंजेक्शन द्वारा लेना होता है। इसके इंजेक्शन को हफ्ते में एक बार लेना होता है। इस इंजेक्शन से मतली, उल्टी, दस्त या कब्ज आदि पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए इसको शुरुआत में बहुत कम डोज से शुरू किया जाता है। एवं डोज को चार हफ्तों के अंतराल से धीरे धीरे बढ़ाया जाता है। इसके पूरे डोज पर पहुंचने में 3 से 4 महीने लग जाते हैं।
यदि यह इंजेक्शन लगातार लिया जाता रहे तो लगभग डेढ़ साल में 20 से 25 प्रतिशत तक वजन कम हो जाता है।

टिर्जेपेटाइड के क्या फायदे हैं?
जैसा कि ऊपर बताया गया है, यह दवाई मोटे लोगों में वजन कम करने के साथ साथ मधुमेह नियंत्रण में भी काफी असरकारक है। इन दोनों विकारों के नियंत्रण से होने वाले सारे फायदे टिर्जेपेटाइड इंजेक्शन लेने से मरीज को प्राप्त होते हैं। जैसे...
1. मधुमेह नियंत्रित रहने से बार बार लगने वाली भूख, प्यास एवं पेशाब की समस्या दूर होती है।
2. बार बार होने वाले इन्फेक्शन की समस्या दूर होती है।
3. घाव जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है।
4. मधुमेह द्वारा होने वाली विकृतियों जैसे, रेटीनोपैथी, नेफ्रोपैथी, न्यूरोपैथी आदि का खतरा टल जाता है।
5. वजन कम होने से ब्लड प्रेशर नियंत्रण में मदद मिलती है।
6. हार्ट अटैक का खतरा कम होता है।
7. वजन कम होने से घुटनों के दर्द और गठिया में आराम मिलता है।
8. खून में खराब कोलेस्ट्रॉल कम होता है।
9. मोटापे और मधुमेह से होने वाली समस्याओं का खतरा कम होता है।
10. नए शोधों में पाया गया है कि हृदय एवं किडनी संबंधित मधुमेह विकार कम होते हैं।
11. मोटापे की वजह से कई लोगों में सोते समय खर्राटे आते हैं व उनकी नींद रात में बार बार उचट जाती है। इस दवाई से इस समस्या से भी छुटकारा पाया जा सकता है।

इस दवाई की कीमत अभी बाजार में बहुत ज्यादा है। इसे लेने का एक माह का खर्च लगभग 10 से 18 हजार तक पड़ता है। आने वाले समय में इससे मिलती जुलती दवाइयां भी बाजार में आने वाली हैं, जिससे इस दवाई का मूल्य कम होने की उम्मीद है। यह दवाई मोटापा कम करने में कारगर है, परन्तु दवाई छोड़ने के बाद वजन फिर बढ़ने लगता है। इसीलिए डॉक्टर इस दवाई को निरंतर लेने की सलाह देते हैं।

इसके विकल्प के रूप में मोटापा कम करने के लिए एक सर्जरी भी बहुत लोकप्रिय हो रही है इस सर्जरी को बेरियाट्रिक सर्जरी कहते हैं। यह सर्जरी दूरबीन (लेप्रोस्कॉपी) द्वारा की जाती है। इसमें स्टमक (भोजन की थैली/आमाशय) के आकर को छोटा कर दिया जाता है, एवं आंतों में बायपास बना दिया जाता है। इस सर्जरी द्वारा 30 प्रतिशत तक वजन कम हो जाता है, एवं फिर से वजन बढ़ने की संभावना कम रहती है। इस प्रकार हम देखते हैं कि, इस सर्जरी को कराने पर होने वाला खर्च लगभग 2 से 3 लाख होता है। जो कि मुंजारो इंजेक्शन से एक साल के उपचार पर होने खर्च के बराबर है।

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