डायबिटीज होने पर डॉक्टर आपको बार-बार यही सलाह देते रहते हैं कि खून में शक्कर की मात्रा को नियंत्रित रखें। उसका एक मुख्य कारण होता है आपको मधुमेह की जटिलताओं से बचाना। मधुमेह की जटिलताएँ मधुमेह से भी अधिक जानलेवा, दुखदाई एवं चिन्ताजनक होती हैं। मधुमेह से उत्पन्न होने वाली जटिलताएँ जिनमें से एक है गुर्दों पर मधुमेह का असर।
दरअसल गुर्दे शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है, जो शरीर के विभिन्न प्रकार के आवश्यक कार्य करते हैं। उनमें से कुछ खास हैं :-
- 1. शरीर से गंदगी की निकासी करना।
- 2. शरीर में पानी की मात्रा को नियंत्रित रखना।
- 3. आवश्यक लवणों का संतुलन बनाये रखना।
इसके अलावा भी शरीर के कई काम गुर्दे करते हैं पर इस लेख में हम इन्हीं पर मुख्य चर्चा करेंगे। आईये देखें कौन-से तत्व हैं जिनका आपको ध्यान रखना है। यदि आपके गुर्दों पर मधुमेह का असर हो गया है।
(1) प्रोटीन : भोजन में हम प्रोटीन नामक एक तत्व का उपयोग भी करते हैं। हम आपको पहले भी बता चुके हैं कि प्रोटीन शरीर की संरचना के लिये एक बहुत ही महत्वपूर्ण तत्व है। यह हमें अण्डा, माँस, दूध एवं दूध की बनी चीजों से दाल एवं दाल की बनी चीजों से, साथ ही अनाज, सोयाबीन, सूखे मेवे एवं गिरियों से भी प्राप्त होता है। प्रोटीन को पचाने के बाद जो वेस्ट (Waste) तत्व बनते हैं वे हैं यूरिया एवं क्रियटिनीन, इनकी निकासी गुर्दे ही करते हैं। अतः प्रोटीन का उपयोग ध्यान से करने की आवश्यकता है। प्रोटीन युक्त वस्तुओं का उतना ही उपयोग करें जितना आपको बताया जाये। याद रखें कि यदि आप एक सीमा से कम प्रोटीन लेंगे तो वह आपको फायदा नहीं देगा, उल्टा नुकसान पहुँचायेगा। इस पर आगे हम और चर्चा करेंगे।
(2) खनिज लवण : सभी खनिज शरीर के लिये आवश्यक होते हैं परंतु यदि किसी के गुर्दे खराब हो जाते हैं तो उनमें कुछ खास लवणों की ओर अधिक ध्यान देना पड़ता है। इनमें से एक है सोडियम और दूसरा है पोटेशियम। इन दोनों का शरीर में सही संतुलन बहुत आवश्यक होता है। यदि सोडियम अधिक होगा तो वह भी नुकसान पहुँचायेगा, पानी को शरीर में पकड़ कर रखेगा और यदि पोटेशियम अधिक होगा तो वह आपके लिये बहुत ही घातक हो सकता है। साथ ही फ़ौसफोरस नाम का एक पदार्थ भी गुर्दों की बीमारी में बढ़ने लगता है। दूसरी ओर कैल्शियम की कमी देखी जाती है।
(3) पानी : गुर्दों का सही प्रकार से काम न करने के कारण पानी की शरीर से निकासी नहीं हो पाती और वह शरीर में एकत्रित होने लगता है और सूजन के रूप में दिखता है। ऐसे में हमें पीने के पानी का भी ध्यान रखना पड़ता है। हो सकता है इन सब बातों को पढ़ कर आप चकरा गये होंगे कि इन सबको कैसे समेटना है, इन सब बातों पर निर्वाह कैसे करना है?
प्रोटीन: जैसा हम बता चुके हैं कि प्रोटीन विभिन्न भोज्य पदार्थों से मिलता है एवं अति आवश्यक भी है। यह देखा गया है कि अधिकतर मरीज गुर्दे की बीमारी का नाम सुनते ही दूध, दालें, अण्डा सभी प्रोटीन की वस्तुएँ छोड़ देते हैं। ऐसे में उनके अन्दर प्रोटीन की बहुत कमी हो जाती है। कई शोधों से यह पता चला है कि अत्यधिक प्रोटीन कम करने से मरीज को लाभ नहीं, अपितु नुकसान ही होता है। सामान्य तौर पर जिस रोगी को गुर्दे की बीमारी है जहाँ गुर्दे काम नहीं कर रहे वहाँ उसकी प्रोटीन की आवश्यकता उसके वजन पर निर्भर करेगी अर्थात् लगभग 0.8 ग्राम प्रोटीन प्रति किलोग्राम भार। हो सकता है किसी-किसी रोगी को उनके डॉक्टर थोड़ा कम या थोड़ा अधिक भी लेने को कहें, परंतु सामान्य गुर्दे के रोगी के लिये इतना प्रोटीन आवश्यक है। अर्थात् यदि आपका शारीरिक वजन 60 कि.ग्रा. है तो आपकी प्रोटीन की आवश्यकता 60×0.8=48.00 ग्राम प्रतिदिन के लगभग है। तो इस प्रोटीन की आवश्यकता को कैसे पूरा करें? किन वस्तुओं से पूरा करें?
प्रोटीन दो प्रकार का होता है :- प्रथम श्रेणी का प्रोटीन एवं द्वितीय श्रेणी का प्रोटीन। प्रथम श्रेणी का प्रोटीन वो प्रोटीन है जो हमें दूध एवं दूध की बनी चीजों से मिलता है- अण्डा, मीट या मछली भी उत्तम प्रकार के प्रोटीन हैं। दूसरी ओर दालें, गिरियाँ, अनाज द्वितीय श्रेणी के प्रोटीन प्रदान करते हैं।
आईये आपको इन वस्तुओं से मिलने वाले प्रोटीन की औसतन मात्रा बताएँ :-
| खाद्य वस्तुएँ | प्रोटीन |
| 150 ग्राम दूध या दही | 5 ग्राम |
| 1 कटोरी पकी दाल (खीर जैसी या सत्तू जैसी गाढ़ी) | 6-8 ग्राम |
| 25 ग्राम मूूँगफली या कोई और गिरी | 8 ग्राम |
| 1 रोटी या सूखा आटा 30 ग्राम | 3 ग्राम |
| 1 कटोरी चावल या सूखा चावल 30 ग्राम | 2 ग्राम |
| 10 ग्राम पनीर | 3.5 ग्राम |
| 1 पूरा अण्डा | 6.6 ग्राम |
| 1 अण्डे की सफेदी | 3.0 ग्राम |
| 100 ग्राम चिकन या मीट या मछली | 20 ग्राम |
मीट, मछली आदि में खनिज की मात्रा बहुत अधिक होती है। अतः इसका उपयोग कभी-कभी करें तो बेहतर है। परंतु इन सब वस्तुओं में अण्डा और दूध गुर्दे के रोगियों के लिये अच्छे पाये जाते हैं। अण्डे की सफेदी, बिना छिलका दाल एवं दही या दूध अच्छे प्रोटीन का स्रोत हैं। क्योंकि दूध एवं दूध की बनी चीजें और अण्डे की सफेदी उत्तम प्रकार का प्रोटीन हैं तो इनका प्रोटीन शरीर बहुत अच्छी प्रकार उपयोग करता है और कोशिश यह होनी चाहिये कि प्रोटीन की आधी आवश्यकता इन वस्तुओं से पूरी हो।
इसीलिये यदि आप माँसाहारी हैं तो दिन में एक अण्डे की सफेदी एवं आपकी आवश्यकता अनुसार दूध या उसकी बनी चीजें आपको लेनी चाहिये। औसतन दूध की मात्रा 300-500 ग्राम प्रतिदिन हो सकती है। इससे आपके शरीर को कैल्शियम भी मिलेगा परंतु यह मात्रा आपकी बीमारी आपके वजन एवं आपकी प्रोटीन की आवश्यकता के साथ बदली जा सकती है। दालों में ध्यान दें कि छिलके वाली दालों में एवं साबुत दालों में ज्यादा खनिज होते हैं जो गुर्दों पर जोर डालते हैं, इसलिये इनका उपयोग न करके बिना छिलके की दाल का उपयोग बेहतर रहेगा। अरहर, धुली, मूूँग या धुली मसूर ऐसे में ठीक रहेंगी। इसी प्रकार यदि आप माँसाहारी हैं तो अण्डे का उपयोग ही ठीक रहेगा। उससे लौह लवण भी प्राप्त होगा परंतु अन्य माँसाहारी पदार्थों का उपयोग सप्ताह में एक बार निर्धारित मात्रा में करें। अतः 1 कटोरी दाल या दही की जगह दो पीस मीट या मछली या मुर्गा का लें, परंतु यह मात्रा 75 ग्राम से अधिक न हो।
औसतन 40 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन प्राप्त करने के लिये सही संतुलन बनाने के लिये नीचे दी गई मात्राओं में आप भोज्य पदार्थों का उपयोग करें।
- आधा किलो दूध या दही या इतने दूध की बनी कोई भी वस्तु जैसे पनीर।
- 1 कटोरी पकी बिना छिलका दाल (25 ग्राम कच्ची दाल)
- यदि केवल अण्डे की सफेदी लेनी हो तो दो अण्डे की सफेदी भी ले सकते हैं। फिर 200 ग्राम दूध या 1 कटोरी दाल कम कर दें।
इस प्रोटीन के साथ कुछ मात्रा में प्रोटीन आपको उस अनाज वाली वस्तुओं से भी मिलेगा जो आप लेंगे। एक चपाती आपको लगभग 3 ग्राम प्रोटीन देती है। इस रोटी का माप है 3 बड़े चम्मच सूखे आटे की एक रोटी। यहाँ आवश्यक है कि थोड़ी बात अनाज के बारे में की जाये।
मधुमेह रोगी होने के नाते हो सकता है कि आप चावल आदि का उपयोग कम करते रहे हों, और मधुमेह को नियंत्रित रखने के लिये आपको बिना छना आटा एवं मोटा अनाज लेने की हिदायत दी जाती होगी। परंतु अब हर समय रोटी खाने के स्थान पर आप चावल, सूजी आदि का उपयोग भी कर सकते हैं। यह इसलिये क्योंकि चावल, सूजी, पोहा आदि में वे खनिज कम पाये जाते हैं जो आपके गुर्दे को नुकसान पहुँचायेंगे। इसीलिए तो गुर्दे के मरीजों को अब साबुत दालें, गिरियाँ खाने के लिये भी मना करते हैं। ऊपर बताई गई एक रोटी के स्थान पर एक कटोरी (200 ग्राम) पका हुआ चावल या पोहा, उपमा या साबुदाना ले सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को लगभग 6 भाग अनाज की कोई भी वस्तु अवश्य लेनी चाहिये। इस प्रकार छह भाग अनाज एवं साथ में एक अण्डे की सफेदी 300 ग्राम दूध (या 500 ग्राम दूध अगर अण्डा नहीं लेते तो) एवं एक कटोरी बिना छिलका दाल लेने से आपको लगभग 40 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन मिलेगा। तो देखा आपने प्रोटीन को बिल्कुल कम नहीं करना है। मजे की बात यह है कि आपके पास बीमारी में भी अच्छे विकल्प निकल आते हैं। उदाहरण के लिये दूध के स्थान पर पनीर या रायता। अण्डे की भुर्जी या ऑमलेट, पिसी मूूँग या धुली उड़द या सूजी का चीला।
यदि आप मधुमेही नहीं हैं तो दूध के स्थान पर रसगुल्ला, खीर भी ले सकते हैं जो दूध की निर्धारित मात्रा के अन्तर्गत हो।
सोडियम: प्रोटीन के बाद, सोडियम एक बहुत महत्वपूर्ण पदार्थ है जिसका आपको ध्यान रखना है। आप सभी जानते हैं कि सोडियम का एक महत्वपूर्ण स्रोत है नमक जिसके बिना खाना बेस्वाद लगता है। नमक से तो हमें सोडियम मिलता ही है जो हम भोजन में डालते हैं, बेकरी की जितनी चीजें होती हैं उनमें भी नमक होता है।
अतः नमक के स्रोत हैं :-
(1) खाने में नमक डालना : 1 छोटा चम्मच नमक लगभग 5 ग्राम सोडियम देता है और यह पाँच चुटकी नमक के बराबर होता है।
(2) कुदरती नमक या सोडियम जो भोज्य पदार्थों में अपने आप होता है। कुछ खाने की चीजों में अधिक सोडियम होता है। जैसे-हरी पत्तेदार सब्जियाँ, खरबूजा, दूध आदि।
(3) कुछ वस्तुएँ इस प्रकार से बनती हैं कि उनमें नमक को किसी-न-किसी प्रकार से डालना ही पड़ता है। जैसे बेकरी की सभी चीजों में खाने वाला सोडा या बेकिंग पाउडर होता है। इसी प्रकार अचार, पापड़ बनाने के लिये जो क्षार उपयोग किया जाता है वह भी आपके अन्दर सोडियम बढ़ा देता है।
यदि आपके लिये निर्धारित मात्रा में बताये गये सोडियम से अधिक सोडियम लेते हैं तो आपके शरीर में पानी अधिक संग्रहित हो जायेगा और यह आपके दिल पर एवं शरीर के विभिन्न हिस्सों में दबाव डालेगा। इसीलिए आपको नमक कम खाने की हिदायत दी जाती है ताकि पानी के एकत्रीकरण से बचा जा सके।
अब देखिये जो सोडियम कुदरती तरीके से भोज्य पदार्थों में मिलता है उसको तो हम निकाल नहीं सकते परंतु जो नमक खाने को स्वादिष्ट करने के लिये उपयोग किया जाता है या जिस स्रोत या बेकिंग पाउडर से चीजें बनती हैं उन्हें तो कंट्रोल कर सकते हैं। इसलिये अपने भोजन में नमक कम करने के लिये :-
(1) सभी बेकरी की चीजों को बन्द कर दें, अर्थात् बिस्कुट, ब्रेड, बन, टोस्ट या रस्क, केक, पेस्ट्री, बाजार के बने हुए सूप के पाउडर या इडली आदि बनाने के लिये बने पाउडर या घर में क्षार से बनाये हुए पापड़, अचार आदि बिल्कुल उपयोग न करें। आप खुद अन्दाजा लगा लें कि एक पीस डबलरोटी से ही आपको 150 मि.ग्रा. सोडियम मिल जाता है।
(2) खाना बनाने के लिये अधिकतर दो से तीन ग्राम नमक प्रतिदिन की हिदायत दी जाती है। जब भी खाना पकाया जाता है तो यदि आप खाना पकाते समय नमक डालते हैं तो अधिक नमक की आवश्यकता पड़ती है, परंतु अगर आप खाना फीका बनाएँ और ऊपर से एक चुटकी नमक खाते समय डालें, तो थोड़े से नमक से ही अधिक स्वाद आ जायेगा।
(3) खाने को नमकीन और खटास प्रदान करने के लिये सिरके का उपयोग करें। उदाहरण के लिये पोहे में वैसे ही नींबू निचोड़ते हैं तो आप नमक के स्थान पर सिरके
का उपयोग करें। बिना नमक डाले ही आपके पोहे में हल्का खटाई वाला नमकीन स्वाद आ जायेगा। इसी प्रकार अचार के स्थान पर यदि पोटेशियम नामक खनिज की कोई रोकथाम न हो तो आप सिरके के साथ पीस कर चटनी बनाएँ। स्वाद भी आ जायेगा एवं नमक का या नींबू का उपयोग भी नहीं होगा।
नमक के स्वाद की मात्रा कुछ हद तक सीखा हुआ स्वाद होता है। अतः चाहें तो इसकी आवश्यकता कुछ हद तक अपने हिसाब से कम की जा सकती है।
पोटेशियम: यह एक और खनिज है जिसके ऊपर नियंत्रण रखना बहुत आवश्यक होता है क्योंकि गुर्दे इसकी निकासी नहीं कर पाते और खून में इसकी मात्रा बढ़ जाने से बहुत घातक परिणाम हो सकते हैं। पोटेशियम सभी भोज्य पदार्थों में पाया जाता है। सबसे अधिक यह हरे पत्ते की सब्जी एवं फलों में पाया जाता है। वैसे यह दूध, दालें, अनाज सभी से मिलता है परंतु जो मात्राएँ दूध, दालों और अनाज की आपको बताई गई हैं, उतना भोजन तो आपको लेना आवश्यक है परंतु सब्जी एवं हरे पत्ते की सब्जी की मात्रा हम नियंत्रित कर सकते हैं।
नीचे आपको विभिन्न भोज्य पदार्थों में पाई जाने वाली पोटेशियम की मात्रा बताई गई है :-
| भोज्य पदार्थ (100 ग्राम) | मात्रा (मि.ग्रा. में) |
| गेहूं का आटा | 300 |
| ताजी मक्का/पोहा | 150 औसतन |
| चावल/सूजी/मैदा/दालें बिना छिलका (25 ग्राम कच्ची) | 200 औसतन |
| दूध | 120 |
अब बात करें उन सब्जियों और फलों की जिनमें पोटेशियम कम होता है। परंतु उसके पहले आप खुद देखें कि आटे से कहीं कम पोटेशियम आपको मक्का, पोहा, चावल, सूजी, मैदा आदि से मिलता है इसलिये अब गेहूं की रोटी उपयोग करने के स्थान पर इन अनाजों का अधिक उपयोग करें। उदाहरण के लिये नाश्ते में पोहा या उपमा, दोपहर और रात के खाने में एक रोटी लेकर चावल का उपयोग अधिक करें। यदि रोटी ही लेनी है तो केवल गेहूं की रोटी न लेकर, आटे में थोड़ा अरारोट पाउडर मिला दें, इससे पोटेशियम की मात्रा और कम हो जायेगी।
नौ फल ऐसे हैं जिनमें कम पोटेशियम पाया जाता है, वे हैं :- सेब (75 मि.ग्रा.), अमरूद (91 मि.ग्रा.), नाशपाती (93 मि.ग्रा.), अनानास (37 मि.ग्रा.) यह सभी मात्राएँ 100 ग्राम फल में हैं। अतः इनमें से कोई एक फल जिसकी मात्रा 100 ग्राम से अधिक न हो, उसका सेवन आप कर सकते हैं। यदि आपको और भी कम मात्रा में पोटेशियम लेना हो तो फल की मात्रा आधी कर दें।
सब्जी :- आलू, अरबी, शकरकन्द, हरे पत्तेदार सब्जियाँ ऐसी हैं जिनमें पोटेशियम अधिक होता है। नीचे दी गई सब्जियों में से कोई भी सब्जी आप ले सकते हैं :-
| सब्जी (100 ग्राम) | सोडियम (मि.ग्रा.) | पोटेशियम (मि.ग्रा.) |
| मेथी | 76 | 31 |
| चुकन्दर | 60 | 43 |
| लौकी | 1.8 | 87 |
| बाफला | 43 | 39 |
| खीरा | 10 | 50 |
| परमल | 2.6 | 83 |
| टिंडा | 35 | 24 |
| गाँठ गोभी | 112 | 37 |
| गाजर | 35.6 | 100 |
| भिण्डी | 6.9 | 103 |
| तोरई | 2.9 | 50 |
इन सब्जियों में से कोई भी सब्जी का 200 ग्राम उपयोग आप करेंगे तो आपको लगभग 100-150 मि.ग्रा. पोटेशियम मिलेगा।
अर्थात् 2 रोटी 4-5 कटोरी अन्य अनाज (चावल, पोहा, सूजी) 1 छोटी कटोरी बिना छिलका दाल, लगभग 400 मि.ग्रा. दूध,
साथ में बताये गये फलों में से कोई भी एक एवं एक कटोरी सब्जी लेने से आपके अन्दर लगभग 1500 मि.ग्रा. पोटेशियम जायेगा। सामान्य व्यक्ति की आवश्यकता 3000 मि.ग्रा. होती है। यदि पोटेशियम और कम करना हो तो बेहतर है कि आप एक विशेषज्ञ की सहायता लें।
पानी :- गुर्दों में बीमारी से कई बार शरीर में से पानी की निकासी कम हो जाती है। अतः डॉक्टर आपको कम पानी पीने की सलाह देंगे। अधिकतर एक लीटर या सवा लीटर पानी की सलाह दी जाती है। निश्चय ही गर्मी के दिनों में इतना कम पानी बहुत असुविधा जनक होता है। उसमें भी आपको दूध, चाय, दाल का रसा सब कुछ जोड़ना है। तो आईये आपको कुछ तरीके बताएँ ताकि आप कम-से-कम चार गिलास पानी अवश्य पी सकें :-
1) अपने आटे को पानी के स्थान पर दूध से गुँधवाये। इसमें प्रोटीन एवं कैल्शियम तो बना रहेगा परन्तु दूध का तरल हिस्सा बच जायेगा क्योंकि यदि आटा गुूँधने के लिये दूध इस्तेमाल होगा तो उतना तरल पदार्थ आपके पास बच जाता है, जिसे आप पीने वाले पानी के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। दूसरी ओर दूध के स्थान पर पनीर का उपयोग करते हैं तो भी पानी बच जाता है। दाल पतली न बनाकर या तो उतनी ही दाल सूखी बनाएँ। चाय छोटे कप में एवं आधा कप ही पियें। इस प्रकार :-
| 1) दो बार आधा कप चाय | 200 मि.ली. |
| 2) 150 ग्राम दूध या दही | 150 मि.ली. |
| 3) आधा कटोरी दाल सूखी | 50 मि.ली. |
| कुल | 500 मि.ली. |
बाकी का दूध पनीर या आटे में डाल कर लें। आधा आटा और आधा अरारोट पाउडर या मैदे की रोटी दूध से गुूँधने पर नरम एवं अच्छी लगेगी। अब आपके पास लगभग 800 मि.ली. (4 गिलास) पानी पीने को बच जाता है। अन्त में सभी बातों का निष्कर्ष इस प्रकार से है :-
ये वस्तुएँ न लें :- सूप, जूस, ठण्डे पेय पदार्थ, कोई भी बेकरी की वस्तु, पापड़, अचार बने बनाए, सूप पाउडर, सॉस, बताई गई सब्जी या फल को छोड़कर कोई और फल।
उदाहरण तालिका :-
प्रत्येक व्यक्ति का खान-पान का ढंग अलग होता है, परंतु फिर भी आपके लिये एक उदाहरण तालिका दे रहे हैं :-
| समय | आहार |
| सुबह 8 बजे | 1/2 कप फीकी चाय नाश्ता 100 ग्राम दूध + 1 कटोरी पोहा या उपमा या 1 रोटी |
| 11 बजे | बताये गये फलों में से एक फल |
| दोपहर का भोजन | 1 चपाती + 1 कटोरी चावल + 150 ग्राम दही या पनीर + 1/2 कटोरी पकी सब्जी या सलाद (खीरा, 1/2 गाजर या चुकन्दर) बताई गई सब्जी में से |
| शाम को | 1/2 कप चाय + सुबह की तरह नाश्ता या साबुदाना खीर या साबुदाना नाश्ता |
| 8-9 बजे | 1 चपाती + 1 कटोरी चावल + 1/2 कटोरी सूखी बिना छिलका दाल + 1/2 कटोरी सब्जी या सलाद (बताई गई सब्जी में से) |
खाना बनाने के लिये तेल = 4 छोटा चम्मच
खाना बनाने के लिये नमक = 2 छोटा चम्मच
इस आहार तालिका से आपको मिलेगा :-
• ऊर्जा – 1600 कैलोरी
• प्रोटीन – 35-40 ग्राम
• सोडियम – 1100 मि.ग्रा. (यदि 2 चुटकी नमक इस्तेमाल करें)
• पोटेशियम – 1500 मि.ग्रा.
भोजन को रुचिकर बनाने के लिये आप दाल+सब्जी+रोटी के स्थान पर बताई गई सब्जी का पुलाव या भरवाँ रोटी साथ में रायता या फीकी खीर या सिवायियाँ ले सकते हैं। दाल के स्थान पर कभी कम बेसन की कढ़ी कर सकते हैं। इस प्रकार अपने भोजन को स्वादिष्ट बनाने के साथ-साथ खराब गुर्दों के के अनुरूप भी बना सकते हैं और स्वस्थ रह सकते हैं।
