हमारे शरीर के पोषण, और विकास के लिए ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत होती है, इसके लिए एकमात्र स्रोत हमारा आहार होता है।
हमारे शरीर में पोषक तत्वों की कमी न हो और शरीर की जरूरत के अनुसार उचित पोषण मिले इसके लिए डॉक्टर्स और आहार विशेषज्ञ संतुलित आहार लेने की सलाह देते हैं।
संतुलित आहार में प्रोटीन, फैट्स, और कार्बोहाइड्रेट का संतुलित अनुपात होना जरूरी होता है, साथ ही विटामिन और मिनरल्स की उचित मात्रा भी जरूरी होती है। इसके लिए अनाज, दालें, फल–सब्जियाँ, ड्राई फ्रूट्स एवं नट्स, डेयरी प्रोडक्ट्स, अंडा, मांस, सी फूड्स, वनस्पति एवं पशु फैट्स और तेल आदि के मिश्रण से तैयार आहार का उपयोग किया जाता है।
इन भोज्य पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट तो आसानी से और प्रचुर मात्रा में मिल जाता है, पर प्रोटीन, हेल्दी फैट्स, और कुछ खास विटामिन जैसे विटामिन बी-12 आदि सभी तरह के भोज्य पदार्थों में नहीं पाए जाते। इनमें भी शाकाहारी लोगों के लिए अच्छे प्रोटीन और विटामिन बी 12 के लिए बहुत कम विकल्प रह जाते हैं। अतः शाकाहारी लोगों के लिए आहार में प्रोटीन और विटामिन बी 12 की संतुलित मात्रा के लिए डेयरी प्रोडक्ट्स को बढ़ाने की सलाह दी जाती है। इसलिए आजकल डेयरी प्रोडक्ट्स की मांग बहुत बढ़ गई है। इनमें भी पनीर की मांग ज्यादा होती है, क्योंकि पनीर में भरपूर प्रोटीन, स्वास्थ्य के लिए अच्छा फैट और विटामिन बी 12 भी पाया जाता है। शुद्ध और असली पनीर से इस मांग को पूरा किया जाना मुश्किल है। अतः आजकल एनालॉग पनीर का प्रचलन बहुत बढ़ गया है। जहाँ असली पनीर पोषण और स्वास्थ के लिए लाभदायक है, वहीं एनालॉग या कृत्रिम पनीर स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक है।
क्या है एनालॉग पनीर या कृत्रिम पनीर?
एनालॉग का मतलब है अनुरूप, रिप्लेसमेंट या पनीर का विकल्प। मतलब एनालॉग पनीर एक नकली पनीर है। यह डेयरी प्रोडक्ट् बिल्कुल भी नहीं है। यह दिखने, स्वाद और बनावट में असली पनीर जैसा ही होता है, पर यह दूध से नहीं बनाया जाता। यह पॉम ऑयल, स्टार्च या मिल्क पाउडर आदि से बनाया जाता है। इसके आकर्षक टेक्सचर एवं लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इसमें इमल्सीफायर और स्टेबलाइजर के रूप में हानिकारक केमिकल्स तो मिलाए ही जाते हैं, इसके अलावा डिटर्जेंट, शैंपू और यूरिया, जैसे खतरनाक केमिकल भी मिलाए जाते हैं। अतः इसमें प्राकृतिक या शुद्ध पनीर जैसे पोषक गुण नहीं होते, बल्कि पॉम ऑयल और अन्य केमिकल्स के हानिकारक प्रभाव जरूर होते हैं।
कैसे बनता है एनालॉग पनीर और क्यों है खतरनाक?
एनालॉग पनीर में डिटर्जेंट, शैंपू और यूरिया मिलाने का मुख्य उद्देश्य असली दूध का इस्तेमाल किए बिना बेहद कम लागत में दूध जैसा गाढ़ापन, झाग, सफेदी और नकली प्रोटीन तैयार करना है। मिलावटखोर इसका इस्तेमाल लैब्स की आँखों में धूल झोंकने और पनीर को बिल्कुल असली जैसा दिखाने के लिए करते हैं। प्राकृतिक दूध के बजाय इन खतरनाक रसायनों को मिलाने के पीछे के मुख्य वैज्ञानिक और व्यावसायिक कारण निम्नलिखित हैं –
- यूरिया : डेयरी टेस्टिंग और लैब जांच में दूध या पनीर की गुणवत्ता उसमें मौजूद प्रोटीन और नाइट्रोजन की मात्रा से मापी जाती है। यूरिया में नाइट्रोजन की मात्रा बहुत अधिक होती है। जब मिलावटखोर पानी और पाम ऑयल के मिश्रण में यूरिया मिलाते हैं, तो वह सिंथेटिक दूध में असली दूध जैसे प्रोटीन का भ्रम पैदा कर देता है। इससे सैंपल शुरुआती साधारण लैब टेस्ट को आसानी से पास कर लेता है।
- डिटर्जेंट और शैंपू : नकली या एनालॉग पनीर बनाने के लिए पानी में घटिया वनस्पति तेल या पाम ऑयल मिलाया जाता है। तेल और पानी कभी आपस में नहीं मिलते इसलिए डिटर्जेंट और शैंपू एक बेहतरीन इमल्सीफायर (Emulsifier) का काम करते हैं, एवं गाढ़े, सफेद दूधिया घोल में बदल देते हैं। शैंपू और डिटर्जेंट इस सिंथेटिक घोल में वैसा ही गाढ़ापन और झाग पैदा करते हैं जैसा प्राकृतिक रूप से दूध में होता है।
- ब्लीचिंग एजेंट्स : नकली पनीर को आकर्षक और बिल्कुल ताजा सफेद दिखाने के लिए इसमें कपड़ों को चमकाने वाले टिनोपाल और आला (Bleaching Agents) जैसे खतरनाक केमिकल मिला दिए जाते हैं। इससे पनीर पीला या गंदा नहीं दिखता।
उपरोक्त खतरनाक केमिकल्स मिले होने के कारण एनालॉग या नकली पनीर स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है।
स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव –
एनालॉग पनीर दूध की बजाय वनस्पति स्किम्ड मिल्क पाउडर, पॉम ऑयल, और कई हानिकारक केमिकल्स से बनाया जाता है, इसका लंबे समय तक उपयोग करने पर स्वास्थ्य पर बहुत से गंभीर और हानिकारक प्रभाव होते हैं। जैसे…
- कार्डियोवैस्कुलर रिस्क– एनालॉग पनीर में पाए जाने वाले पॉम ऑयल और रिफाइंड सैचुरेटेड फैट्स LDL कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड को बढ़ाते हैं, जिससे कोरोनरी आर्टरीज में फैट जमने लगता है, एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं। इससे न केवल हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता बल्कि स्ट्रोक (लकवा) का भी खतरा बढ़ जाता है। कम उम्र में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों में भी एनालॉग पनीर का सेवन एक बड़ा कारण है।
- पाचन तंत्र और लिवर को नुकसान – इसमें पाए जाने वाले स्टार्च, केमिकल और पॉम ऑयल आसानी से नहीं पचते, जिससे गैस, बदहजमी आदि होती है। रिफाइंड फैट्स, और पॉम ऑयल लिवर में इकठ्ठा होकर जमने लगता है, जिससे फैटी लिवर होने का खतरा बढ़ जाता है।
- किडनी पर असर – लंबे समय तक एनालॉग पनीर के स्तेमाल से इसमें पाए जाने वाले प्रिजर्वेटिव, स्टेबलाइजर, इमल्सीफायर आदि खतरनाक केमिकल्स शरीर में जमा होते रहते हैं। जो किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं।
- वजन बढ़ना – एनालॉग पनीर अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स की श्रेणी में आता है। पॉम ऑयल और इसमें मिले केमिकल्स के कारण यह हाई फैट और कैलोरी से भरपूर होता है। अतः इसके सेवन से मोटापा तेजी से बढ़ता है।
- मधुमेहियों के लिए खतरा – असली पनीर में कार्बोहाइड्रेट न के बराबर होता है, जिससे ब्लड शुगर नहीं बढ़ता। लेकिन एनालॉग पनीर में आलू, कॉर्न, और साबूदाने से निर्मित रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और स्टार्च होते हैं, जो शरीर में जाते ही तेजी से ग्लूकोज में बदल जाते हैं, जिससे डायबिटीज के मरीजों का ब्लड ग्लूकोज अचानक तेजी से बढ़ (Spike) जाता है।
इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाला घटिया वनस्पति तेल और हाइड्रोजनेटेड फैट्स (ट्रांस फैट) शरीर में फैट जमा करते हैं। इसके लंबे समय तक सेवन से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है। - पोषण की कमी – लोग पनीर को अच्छा प्रोटीन और कैल्शियम का स्रोत मनाकर खाते हैं। पर एनालॉग पनीर दूध से नहीं बनता इसलिए इसमें असली पनीर जैसे अच्छे प्रोटीन और कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व नहीं होते। केवल शरीर के लिए हानिकारक फैट्स, और हाई कैलोरी ही होती है। अतः इससे उचित पोषण मिलता ही नहीं है। जो लोग पनीर के लाभ पाने के लिए एनालॉग पनीर का स्तेमाल करते हैं, उन्हें इसके सेवन से पोषण के नाम पर खराब फैट और खतरनाक केमिकल्स का धोखा ही मिलता है।
एनालॉग पनीर के इन्हीं खतरों और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक प्रभावों को देखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के आधार पर महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों में इसके निर्माण और बिक्री पर सख्त प्रतिबंध जैसी कार्यवाही की जा रही है।
कहाँ ज्यादा उपयोग होता है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर सस्ता होने के कारण ढाबा, रेस्टोरेंट, होटल्स, फास्ट फूड जॉइंट और बिना लाइसेंस वाले लोकल वेंडर्स द्वारा अत्याधिक उपयोग किया जाता है। बड़े समारोहों में कई कैटरर्स भी इसका इस्तेमाल करते हैं। स्ट्रीट फूड वेंडर भी पनीर से बनने वाली फास्ट फूड डिशेज में इसका स्तेमाल करते हैं। जैसे पनीर टिक्का, चिली पनीर, पिज्जा, बर्गर आदि में।

कैसे पहचानें एनालॉग पनीर को?
घर पर असली और एनालॉग (नकली) पनीर की पहचान के आसान तरीके –
*1. मसलकर देखें : असली पनीर मसलने पर में भुरभुरा (Crumbly) हो जाता है और इसके छोटे-छोटे टुकड़े या दाने अलग हो जाते हैं। एनालॉग पनीर मसलने पर टूटने के बजाय रबर या क्ले (Clay) की तरह खिंचने लगता है।
2. आयोडीन टेस्ट (The Iodine Test) – पनीर के एक टुकड़े को पानी में उबालें और उसे थोड़ा ठंडा होने दें। इसके बाद उस पर आयोडीन लिक्विड या टिंक्चर की कुछ बूंदें डालें। असली पनीर का रंग वैसा ही रहेगा, कोई बदलाव नहीं होगा। एनालॉग पनीर का रंग तुरंत नीला या गहरा बैंगनी हो जाएगा।
3. तुअर दाल टेस्ट : पनीर के टुकड़े को पानी में उबालें। अब इस उबले हुए पानी और पनीर में तुअर की दाल का पाउडर या सोयाबीन का पाउडर मिलाकर 5-10 मिनट के लिए छोड़ दें।असली पनीर से पानी के रंग में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। एनालॉग पनीर से पानी का रंग धीरे-धीरे हल्का लाल या गुलाबी होने लगेगा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नकली पनीर में मौजूद डिटर्जेंट या यूरिया, दाल के प्रोटीन के साथ मिलकर रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं।
4. चखने और सूंघने से पता करें : असली पनीर की महक शुद्ध दूध जैसी होती है। इसे चबाने पर यह मुँह में आसानी से घुल जाता है और इसका स्वाद क्रीमी होता है। एनालॉग पनीर में कोई प्राकृतिक दूधिया महक नहीं होती। इसे चबाने पर यह च्युइंग गम या रबर की तरह खिंचता है और मुँह में चिपकता है।
5. तलने या पकाने से पहचान : असली पनीर तलने पर हल्का सुनहरा होता है और सॉफ्ट बना रहता है। एनालॉग पनीर गर्म तेल में डालते ही यह रबर जैसा लचीला और कड़ा हो सकता है या फिर बहुत जल्दी पिघलकर बिखरने लगता है क्योंकि इसमें वनस्पति फैट और मिलावटी तेल होते हैं।
आजकल पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य सामग्रियों का चयन करने में बहुत सावधानी की जरूरत है। शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन, अच्छे फैट्स, कैल्शियम, विटामिन बी 12 एवं अन्य पोषक तत्वों के स्रोत सीमित हैं। शाकाहारी लोगों के लिए डेयरी उत्पाद बहुत जरूरी हैं। इन प्रोडक्ट्स की मांग की तुलना में अक्सर कमी देखी जाती है। दुर्भाग्य से हमारे देश में डेयरी प्रोडक्ट में मिलावटखोरी और नकली उत्पादों की भरमार है। जरा सी चूक या लापरवाही से हमें पोषण की जगह जहर थमा दिया जाता है। अतः सतर्क रहें कहीं आपकी थाली में ये खतरनाक केमिकल्स तो नहीं परोसे जा रहे।
सावधानी से इनसे बचें और सही उत्पाद चुनकर अपने स्वास्थ्य की रक्षा करें।
