अलेक्जेंडर ज्वेरेव की ग्रैंड स्लैम जीत बनी टाइप 1 डायबिटीज मरीजों के लिए प्रेरणा।

पेशेवर खेल में उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा के साथ टाइप 1 डायबिटीज की चुनौतियों का सामना करना आसान नहीं है।चार साल की उम्र में टाइप 1 डायबिटीज का पता चलने और इंसुलिन थेरेपी व लगातार ग्लूकोज मॉनिटरिंग पर निर्भर रहने वाले अलेक्जेंडर ज्वेरेव का टेनिस के शिखर पर पहुँचना साहसिक और प्रेरणादायक उपलब्धि है।

टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति के जीवन में कई स्वास्थ्य और दिनचर्या से जुड़ी चुनौतियां होती हैं। इन लोगों को अपने जीवन में कई कठिनाइयाँ उठानी पड़ती हैं। इसके लिए इन्हें अपने नियमित इलाज, संतुलित जीवन शैली के साथ मजबूत मनोबल, सतर्कता और साहस की जरूरत होती है।

इन मरीजों को यह मनोबल, सतर्कता, साहस और चिकित्सकों के मार्गदर्शन से तो मिलते ही हैं। इसके अलावा अन्य टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों के सफल और स्वस्थ जीवन की प्रेरणादायक घटनाओं से और अधिक साहस मिलता है।

ऐसे कई व्यक्ति हुए हैं, जिन्हें 4 साल से कम उम्र में टाइप 1 डायबिटीज हुई, और वे शुरुआत से ही स्वयं को इंसुलिन लेने सहित कई चुनौतियों से संघर्ष करते हुए न केवल लंबा और स्वस्थ जीवन जीने में सफल रहे, बल्कि अपने जीवन में कई उपलब्धियां भी हासिल कीं।

ऐसे ही व्यक्ति हैं अलेक्जेंडर ज्वेरेव। इस लेख में हम उनके टाइप 1 डायबिटीज के साथ जीवन के संघर्ष और सफलता पर प्रकाश डालेंगे। उनकी यह साहसिक उपलब्धि कई टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों को प्रेरणा देगी।

अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने 2026 फ्रेंच ओपन में अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता। यह उनका 34 वां प्रयास था। इस जीत के बाद वे पुरुष एकल खिताब जीतने वाले पहले जर्मन भी बने। इसके बाद 12 जुलाई को वह विंबलडन चैंपियनशिप के फाइनल चरण में भी पहुँचे। और शायद सबसे बढ़कर, ज्वेरेव इस प्रतियोगिता में जीत हासिल करने वाले टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित पहले व्यक्ति बने।

टाइप 1 डायबिटीज एक कठिन स्थिति है जिसे एक आम इंसान के लिए भी संभालना मुश्किल होता है, एक खिलाड़ी की तो बात ही छोड़िए। ज्वेरेव ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि, टेनिस मैच के दौरान ब्लड ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित रखना “एक साथ दो खेल खेलने” जैसा है।

क्या है टाइप 1 डायबिटीज?
शरीर भोजन में मौजूद शर्करा और कार्बोहाइड्रेट को पचाता है, व उन्हें ग्लूकोज में तोड़ देता है, ग्लूकोज शरीर की कोशिकाओं के लिए मुख्य ईंधन है। भोजन के बाद, रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ते ही इंसुलिन का स्राव शुरू हो जाता है। इंसुलिन रक्तप्रवाह से ग्लूकोज को तत्काल उपयोग के लिए अवशोषित करने में कोशिकाओं की मदद करता है। तथा अतिरिक्त ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में लिवर में संग्रहीत करने का काम भी करता है, जो बाद में जरूरत पड़ने पर शरीर द्वारा उपयोग किया जा सके। इस तरह रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित रखने और ग्लूकोज को कोशिकाओं में पहुँचाने तथा ऊर्जा उत्पादन के लिए इंसुलिन प्रमुख हार्मोन है। टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें पैंक्रियाज में इंसुलिन बनाने वाली बीटा-कोशिकाऐं नष्ट हो जाती हैं, जिसके कारण शरीर में इंसुलिन ही नहीं बन पाता। अतः टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए इंजेक्शन द्वारा दिन में 2 से 3 बार बाहर से इंसुलिन लेने की आवश्यकता होती है।

खेल के दौरान टाइप 1 डायबिटिक को क्या कठिनाई हो सकती है?
टेनिस की अपनी अनूठी और गतिशील स्कोरिंग प्रणाली के कारण इसमें बहुत तेजी से खिलाड़ी के स्कोर में उतार चढ़ाव देखने को मिलता है। और खिलाड़ी को हमेशा शक्रिय और बेहद चौकन्ना रहना पड़ता है।

इसी तरह, टाइप 1 डायबिटीज के कारण खून में ग्लूकोज का स्तर अनियंत्रित रूप से बढ़ जाता है। इसे इंसुलिन इंजेक्ट करके प्रबंधित किया जाता है। ऐसा करने के उपकरणों में इंसुलिन पेन, सीरिंज और इंसुलिन पंप आदि शामिल हैं। विभिन्न परिस्थितियों में बाहर से दी जाने वाली इंसुलिन के कारण खून में ग्लूकोज की अत्यधिक कमी भी हो सकती है, जिसे हाइपोग्लाइसीमिया कहते हैं।
अतः टेनिस में खिलाड़ी के स्कोर में उतार चढ़ाव की तरह ही टाइप 1 डायबिटीज मरीज के खून में ग्लूकोज के स्तर में उतार चढ़ाव देखा जाता है।

मैच के दौरान ज्वेरेव को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा जो निम्नानुसार हैं…
इंसुलिन इंजेक्ट करने के बारे में जागरूकता की कमी के कारण कभी-कभी गलतफहमियाँ भी पैदा हो जाती हैं। ज्वेरेव को 2023 फ्रेंच ओपन में ऐसे ही एक मामले का सामना करना पड़ा था, जहाँ एक मैच अधिकारी ने उनसे कहा था कि वह कोर्ट पर इंसुलिन इंजेक्ट नहीं कर सकते क्योंकि यह “अजीब” लग रहा था और इसके लिए उन्हें अपने तीन मिनट के टॉयलेट ब्रेक का उपयोग करना होगा। पर इसके लिए टॉयलेट ब्रेक ही काफी नहीं है। क्योंकि आम तौर पर उन्हें एक मैच के दौरान चार से पाँच बार इंजेक्शन लगाना पड़ता है।

ज्वेरेव जैसे खिलाड़ियों को इस अनिश्चितता से भी निपटना पड़ता है कि कब हाइपर- या हाइपोग्लाइसेमिक एपिसोड शुरू हो सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया स्कूल ऑफ सोशल वर्क के शोधकर्ताओं द्वारा 2025 के एक अध्ययन में पाया गया कि टाइप 1 डायबिटीज को प्रबंधित करने के लिए अत्यधिक सतर्कता (हाइपरविजिलेंस) मानसिक स्वास्थ्य पर खराब असर करती है। अच्छी और पर्याप्त नींद खिलाड़ियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य और फिटनेस के लिए महत्वपूर्ण हैं। हाइपोग्लाइसीमिया नींद की गुणवत्ता को भी खराब कर सकता ह।

टेनिस में रिकवरी न्यूट्रिशन कार्बोहाइड्रेट के माध्यम से ग्लाइकोजन के स्तर को बढ़ाने पर केंद्रित होता है। हालांकि, ऐसा करने से खून में ग्लूकोज के स्तर में भारी उछाल का जोखिम होता है। अतः इस तरह का रिकवरी न्यूट्रिशन टाइप 1 डायबिटिक एथलीट के लिए खतरनाक हो सकता है। परन्तु पर्याप्त न्यूट्रिशन कार्बोहाइड्रेट के बिना मैच में किया गया शारीरिक श्रम ग्लूकोज के स्तर को क्रैश कर सकता है।
अतः टाइप 1 डायबिटिक एथलीट के लिए यह दोहरी और कठिन चुनौती है।

ज्वेरेव ने बताया कि, उनसे कहा गया था कि वे अपने टाइप 1 डायबिटीज निदान के बाद कभी भी एक विशिष्ट एथलीट नहीं बन सकते। इसलिए उन्होंने चार साल तक अपने करियर के दौरान इस स्थिति को छुपाया, और विवेकपूर्ण तरीकों से इसे प्रबंधित करना जारी रखा। यह उनके मजबूत मनोबल को दर्शाता है।

एक बार ग्लूकोज मॉनिटर ने उन्हें गलत रीडिंग दी और उन्होंने आवश्यकता से अधिक इंसुलिन इंजेक्ट कर लिया।इन खारों से बचने के लिए उन्हें अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है। अतः सार्वजनिक स्थानों पर वे अपने ग्लूकोज स्तर की निगरानी के लिए CGM का उपयोग करते हैं।

अतः हमने जाना कि सामान्य खिलाड़ियों से भिन्न टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित खिलाड़ी को कई गुना ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह कठिन जरूर है पर इन चुनौतियों का सामना रणनीति और सतर्कता से किया जा सकता है। यही करके दिखाया है अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने।
इससे दुनिया भर के टाइप 1 डायबिटिक लोगों को सीखना चाहिए, और हौसला रखना चाहिए।
उन्होंने कोर्ट के अंदर और बाहर दोनों जगह टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों की वकालत भी की है, और टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों की मदद के लिए अपने नाम पर एक फाउंडेशन की स्थापना भी की है।

उनके यह कार्य और उपलब्धियाँ गौरवान्वित करने वाली तो है ही। साथ ही दुनिया भर के कई टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए प्रेरणादायक भी है। इससे के टाइप 1 डायबिटिक लोगों को सीखना चाहिए, और हौसला रखना चाहिए, वे भी अपनी डायबिटीज को नियंत्रित रखते हुए सफल और पूर्ण जीवन खुशहाली से जी सकते हैं।

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