हमारी जीवन शैली हमारे जीवन जीने के तरीके को कहा जाता है। इसके मुख्य घटक के तौर पर हमारा रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, काम करने के ढंग, रुचियां, विचार और दैनिक आदतें हैं। इन सब का हमारे स्वास्थ्य पर सीधा और गहरा असर पड़ता है। खास तौर पर हमारा रहन-सहन और खान-पान ही हमारे स्वस्थ जीवन का आधार है।
हमारे दैनिक खान-पान के अंतर्गत विभिन्न भोज्य पदार्थ होते हैं, जिनमें कई स्वास्थ्य के लिए अच्छे, और कुछ खराब होते हैं। ज्यादातर भोज्य पदार्थों को सीधे नहीं खाया जा सकता, अतः उन्हें खाने लायक बनाया जाता है। उस प्रक्रिया को फूड प्रोसेसिंग (खाद्य प्रसंस्करण) कहा जाता है।
आइए जानते हैं क्या है फूड प्रोसेसिंग…
फूड प्रोसेसिंग या ‘खाद्य प्रसंस्करण’ का अर्थ है—कच्चे कृषि एवं पशु उत्पादों, अनाजों, फलों, सब्जियों या दूध, अंडा, मांस, आदि को विभिन्न तकनीकों (जैसे सफाई, पकाना, पीसना, डिब्बा बंद करना या केमिकल मिलाना) द्वारा खाने योग्य, स्वादिष्ट एवं लंबे समय तक सुरक्षित रहने योग्य खाद्य पदार्थों में बदलना।
उदाहरण के तौर पर, गेहूं से आटा बनाना, टमाटर से सॉस या केचप बनाना, फलों से जूस, जैम या अचार तैयार करना, दूध से पनीर, दही, मक्खन या घी बनाना आदि। खाद्य प्रसंस्करण से भोजन को जल्दी सड़ने या खराब होने से बचाना, गुणवत्ता और स्वाद को बेहतर बनाना और पौष्टिकता बढ़ाना। यह हमारे भोज्य पदार्थों को खाने लायक बनाने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। फूड प्रोसेसिंग के आधार पर भोज्य पदार्थों के वर्गीकरण के लिए वैश्विक स्तर पर NOVA प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
NOVA खाद्य वर्गीकरण प्रणाली:
NOVA खाद्य वर्गीकरण प्रणाली वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त है। यह भोज्य पदार्थों को उनके पोषक तत्वों या कैलोरी के बजाय, फूड प्रोसेसिंग के आधार पर चार स्पष्ट श्रेणियों में विभाजित करती है।
1: अनप्रोसेस्ड फूड्स या कम प्रोसेस्ड फूड्स:
ताजे फल, सब्जिययाँ, दालें, चावल, मांस, मछली और दूध। इन पर कोई बदलाव नहीं होता या केवल सफाई, कोल्ड स्टोरेज, पॉश्चराइजेशन, या सुखाने जैसी हल्की प्रक्रियाएं होती हैं।
2: प्रोसेस्ड कल्नरी सामग्री:
वनस्पति तेल, मक्खन, घी, चीनी और नमक। इन्हें पहले समूह के ताजे भोजन को पकाने और तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
3: प्रोसेस्ड फूड्स:
डिब्बाबंद सब्जियां, नमकीन या मीठे मेवे, मिठाइयां, पनीर और ताजी रोटी। इन्हें समूह 1 की चीजों में नमक, तेल या चीनी मिलाकर संरक्षित किया जाता है।
4: अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स या फास्ट फूड या जंक फूड्स)
आधुनिक युग में भोज्य पदार्थों को अत्यधिक प्रोसेस किया जाने लगा है। ये औद्योगिक रूप से कई रासायनिक और भौतिक प्रक्रियाओं के जरिए बनाए जाने वाले ऐसे भोज्य पदार्थ हैं, जिनमें कृत्रिम रंग, प्रिजर्वेटिव, फ्लेवर, अतिरिक्त चीनी, नमक और हानिकारक फैट मिलाए जाते हैं।
उदाहरण: पैकेटबंद चिप्स और नमकीन, कोल्ड ड्रिंक और पैकेज्ड जूस, इंस्टेंट नूडल्स और सूप पैकेट, बिस्कुट, कुकीज़ और चॉकलेट,आइसक्रीम और कैंडी, रेडी-टू-कुक, एवं रेडी-टू-ईट फ्रोजन फूड आदि। आजकल इस तरह के भोज्य पदार्थों की हमारे बाजारों, और घरों में भरमार है।
हाई फैट, शुगर एंड सॉल्ट (HFSS):
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स, जंक फूड्स या फास्ट फूड्स HFSS वाले फूड के रूप में जाने जाते हैं। इनमें शक्कर, फैट, और नमक की मात्रा हमारी दैनिक आवश्यकता से बहुत ज्यादा होती है।
समोसा, कचौरी, चिप्स, भटूरा, फ्रेंच फ्राइस, पिज्जा और बर्गर आदि में हाई फैट होता है।
कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, चॉकलेट, केक, बिस्कुट, आईस क्रीमऔर मिठाइयों में हाई शुगर होती है।
इंसटेंट नूडल्स, नमकीन, सॉस, अचार और डिब्बाबंद सूप आदि में हाई साल्ट होता है।

एनालॉग फूड्स:
कई मिलावटी या कृत्रिम खाद्य पदार्थ भी अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स के श्रेणी में आते हैं। खास तौर पर डेयरी प्रोडक्ट्स के विकल्प के रूप में, जैसे एनालॉग पनीर, कृत्रिम दूध, दूध पाउडर आदि। ये पदार्थ वास्तव में दुग्ध उत्पाद नहीं होते, इन्हें स्टार्च, वनस्पति फैट या तेलों के साथ इमल्सीफायर एवं विभिन्न हानिकारक केमिकल मिलाकर तैयार किए जाते हैं। पनीर, घी, छैना, मावा, आजकल एनालॉग या सिंथेटिक रूप में औद्योगिक स्तर बहुत ज्यादा बनाये जाते हैं।
अन्य एनालॉग जैसे… एनालॉग मीट, एनालॉग अंडे, एनालॉग सी फूड भी आजकल बहुत प्रचलन में हैं। ये सभी बाजारों में प्रचुरता से उपलब्ध हैं। ये खाद्य पदार्थ भी स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं।
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स के अत्याधिक उपयोग का कारण…
- व्यस्त जीवन शैली, घर से दूर रहना आदि के कारण, खाना पकाने के लिए समय और सुविधा नहीं मिल पाती, ऐसे में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का उपयोग आसान और सुविधाजनक है।
- आजकल परिवार में पति पत्नी दोनों जॉब करते हैं, ऐसी परिस्थितियों में समय बचाने के लिए भी अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का उपयोग बढ़ रहा है। ऐसे घरों के स्टोर और रेफ्रिजरेटर अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स से भरे रहते हैं।
- बाजारों में प्रचुरता, बढ़ता हुआ व्यापारिक कॉम्पिटीशन, विज्ञापन, क्विक कॉमर्स, फूड डिलेवरी ऐप्स आदि ने इन भोज्य पदार्थों को बहुत सस्ता, सहज और सुलभ बना दिया है। यह भी अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स के उपभोग को बढ़ावा देने का बड़ा कारण है।
- टीवी पर आने वाले लुभावने विज्ञापनों की वजह से बच्चों में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स, खासकर, टॉफी, कैंडी, कोल्ड ड्रिंक्स, इंस्टेंट नूडल, पिज्जा, बर्गर आदि की लत बढ़ रही है। अधिकांश वयस्क भी इनकी आदतों से नहीं बच पाते। और इनका उपभोग बढ़ रहा है।
- अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स को ‘एडिक्टिव’ (लत लगाने वाला) भी बनाया जाता है। इन्हें इस प्रकार केमिकली इंजीनियर किया जाता है कि ये हमारे दिमाग के ‘रिवार्ड सेंटर’ (Reward Center) को उत्तेजित करते हैं। इनमें वसा, नमक, चीनी, और कृत्रिम स्वादों का ऐसा संतुलन बनाया जाता है जिसे विज्ञान में हाइपर पेलेटेबिलिटी (Hyper-palatability) कहते हैं। इसका मतलब भोजन का अत्यधिक स्वादिष्ट और आकर्षक होना है। यह भोजन की एक ऐसी स्थिति है जहां इंसानी दिमाग इसके स्वाद का विरोध नहीं कर पाता और पेट भरा होने पर भी इसे खाने की इच्छा होती है।
येल फूड एडिक्शन स्केल के अनुसार, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स में वही गुण पाए जाते हैं जो किसी नशीले पदार्थ में होते हैं, जैसे….
तीव्र लालसा (Cravings) और भोजन पर से नियंत्रण खोना।
विथड्रॉअल लक्षण: इन्हें छोड़ने पर मानसिक बेचैनी और चिड़चिड़ापन।
लत: नुकसान जानने के बाद भी इन भोज्य पदार्थों को लगातार सेवन करने की आदत हो जाना।
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव :–
चिकित्सा क्षेत्र में मरीजों से उनके आहार, जीवनशैली, वजन और डायबिटीज नियंत्रण पर चर्चा की जाती है। इसे लेकर लोग अक्सर कैलोरी और कार्ब्स गिनने में इतने उलझ जाते हैं कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स के असली खतरे को अनदेखा कर देते हैं। नवीन शोधों से यह स्पष्ट हो चुका है कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स स्वतंत्र रूप से, टाइप 2 डायबिटीज, मोटापा, और अल्ज़ाइमर/डिमेंशिया के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
मोटापा (Obesity): इन खाद्य पदार्थों में कैलोरी अधिक और जरूरी फाइबर कम होता है, जिससे पेट जल्दी नहीं भरता और लोग जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं। हमारी आबादी में दिख रहे मोटापे के पीछे असल में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का अधिक सेवन भी एक मुख्य वजह है।
टाइप-2 डायबिटीज: इनमें रिफाइंड कार्ब्स और शुगर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो ब्लड शुगर के स्तर को अचानक बढ़ा देते हैं।
हृदय रोग (Heart Disease): उच्च सोडियम (नमक) और ट्रांस फैट के कारण ब्लड प्रेशर और बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जिससे दिल के दौरे का खतरा पैदा होता है। यह खतरा खासतौर पर अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स में स्तेमाल होने वाले ट्रांस फैट्स (हाइड्रोजनेटेड ऑयल्स) के कारण होते हैं।
पाचन तंत्र की समस्याएं: फाइबर की कमी के कारण कब्ज, एसिडिटी और आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुँचता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर: अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का बच्चों और बड़ों में तनाव, एंग्जायटी और मानसिक थकान से सीधा संबंध पाया गया है।
कैंसर का खतरा: कुछ हानिकारक केमिकल प्रिजर्वेटिव्स (जैसे नाइट्रेट्स) लंबे समय तक शरीर में रहकर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स को कैसे पहचानें?
पैक्ड फूड्स में इंग्रेडिएंट्स की लिस्ट होती है, इसे पढ़ें, यदि निम्न में से एक भी घटक इन भोज्य पदार्थों में हैं, तो वह अति-प्रसंस्कृत भोजन है….
हाई-फ्रक्टोज कॉर्न सिरप (HFCS) या रिफाइंड शुगर्स।
हाइड्रोजनेटेड ऑयल्स (ट्रांस फैट्स)।
प्रोटीन आइसोलेट्स या माल्टोडेक्सट्रिन
कृत्रिम रंग।
फ्लेवर एनहांसर या फ्लेवरिंग एजेंट।
प्रिजर्वेटिव्स।
इमल्सीफायर और स्वीटनर्स
इसके अतिरिक्त यदि लिस्ट में ऐसे केमिकल के नाम हैं जो आपकी रसोई में मौजूद नहीं होते या जिन्हें बोलना कठिन है, तो वह अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड है।
इनसे कैसे बचें?
अचानक सब कुछ बंद करने के बजाय, स्वस्थ विकल्पों से इन्हें धीरे धीरे बदलें।
जैसे….
- दही और मीठे स्नैक्स का विकल्प
कृत्रिम चीनी और फ्लेवर से बचें
बाजार के फ्लेवर्ड फ्रूट योगर्ट के बजाय सादा दही लें और उसमें ताजा कटे फल मिलाकर खाएं। - सुबह के नाश्ते में बदलाव
पैकेज्ड कॉर्नफ्लेक्स या प्रोसेस्ड एनर्जी बार की जगह सादा ओट्स, दलिया या भुने हुए मेवे (Nuts) चुनें। - ब्रेड के केमिकल-फ्री विकल्प
इमल्सीफायर और प्रिजर्वेटिव्स वाली इंडस्ट्रियल ब्रेड की जगह पारंपरिक आटा/मल्टीग्रेन ब्रेड या घर की रोटी को प्राथमिकता दें। - बारकोड स्कैन तकनीक जैसी डिजिटल मदद लें
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और प्रोसेसिंग स्तर जाँचने के लिए Yuka या Open Food Facts जैसे मोबाइल ऐप्स का उपयोग करें।
अपने आहार में परिवर्तन करने में जल्दबाजी की जगह धीरे धीरे बदलाव करें। कभी-कभार अपनी पसंदीदा चीज (जैसे महीने में एक बार आइसक्रीम) खाने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन दैनिक आहार में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स को कम या बंद करना मधुमेह, मोटापे, हृदय रोग और मस्तिष्क के विकारों से बचने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
अतः वजन कम करने के लिए, मधुमेह नियंत्रण के साथ स्वस्थ रहने के लिए केवल कैलोरी कम करना पर्याप्त नहीं है, इसके साथ भोजन की गुणवत्ता और उसकी प्रोसेसिंग
की जानकारी रखना भी जरूरी है। मतलब कितना खाना है? क्या खाना है? और कैसा खाना है? इन तीनों बातों का ध्यान रखकर अपना संतुलित आहार चुनें, और स्वस्थ रहें।
